इक धुंधली सी याद कभी पलकों पे दस्तक देती है,
मन के दर्पण को बीती तस्वीरों से भर देती
है ।
कुछ ना
लगता गलत हमें हर लम्हा थम सा जाता है,
जब इक
मीठा सा चेहरा उस पल पास हमारे आता है ।
बंद
आँखों से भी वो पलकें साफ़ दिखाई देतीं हैं,
वहां ना
होने पर होने का एहसास कराती रहती हैं ।
उस चेहरे
की मासूम हंसीं पी लेने का जी करता है,
उन
लम्हों में सारी सदियाँ जी लेने का जी करता है ।