Saturday, 10 March 2012

इक धुंधली सी याद



इक धुंधली सी  याद कभी पलकों पे दस्तक देती है,
मन के दर्पण को बीती तस्वीरों से भर देती है ।

कुछ ना लगता गलत हमें हर लम्हा थम सा जाता है,
जब इक मीठा सा चेहरा उस पल पास हमारे आता है 

बंद आँखों से भी वो पलकें साफ़ दिखाई देतीं हैं,
वहां ना होने पर होने का एहसास कराती रहती हैं 

उस चेहरे की मासूम हंसीं पी लेने का जी करता है,
उन लम्हों में सारी सदियाँ जी लेने का जी करता है 


Friday, 9 March 2012

इक बार छत पे


इक बार छत पे आँखें चार करते हुए देखा था,
बस इशारों में बात करते हुए देखा था ।

होठों से बिना बोले इज़हार करते हुए देखा था,
उन निगाहों से हमने इकरार करते हुए देखा था ।

न जाने किस मोड़ पे मिलेंगे रास्ते,
हमने मुश्किलों से दो चार करते हुए देखा था ।

जाने कब दूर होंगे दरमियाँ के फासले,
हमने कोशिशों को आर पार करते हुए देखा था ।

समय गुज़रते हुए थम भी जाता कभी,
रात दिन को दिन रात करते हुए देखा था ।

उन बंद लबों से भी चाहत की हमने,
हर एक बात करते हुए देखा था !